अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि ॥ 1.11 ॥
सभी मोर्चों पर, जहाँ-जहाँ आप लोग तैनात हैं, वहाँ-वहाँ आप सब लोग भीष्म पितामह की ही सब ओर से रक्षा करें।
विस्तार: दुर्योधन अपनी सेना के प्रमुख योद्धाओं से आग्रह करता है कि वे सेनापति भीष्म की सुरक्षा सुनिश्चित करें। 'भीष्ममेवाभिरक्षन्तु' (भीष्म की ही रक्षा करें) शब्द का प्रयोग दुर्योधन की इस गहरी चिंता को दर्शाता है कि यदि उनके सबसे बड़े और सबसे भरोसेमंद योद्धा भीष्म गिर जाते हैं, तो युद्ध हारना निश्चित है।