ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ ।
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः ॥ 1.14 ॥
इसके बाद, सफेद घोड़ों से युक्त विशाल रथ पर बैठे हुए भगवान श्रीकृष्ण (माधव) और अर्जुन (पाण्डव) ने भी अपने दिव्य (अलौकिक) शंख बजाए।
विस्तार: कौरवों के भयानक शोर के जवाब में, पाण्डव सेना के सबसे प्रमुख दो व्यक्तित्व - सारथी बने श्रीकृष्ण और योद्धा अर्जुन - ने शंखनाद किया। उनके शंखों को 'दिव्य' (दैवीय) बताया गया है, जो यह दर्शाता है कि पाण्डवों का पक्ष धर्म और ईश्वर द्वारा समर्थित है।