काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः ।
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः ॥ 1.17 ॥
उत्तम धनुषधारी काशिराज, महारथी शिखण्डी, धृष्टद्युम्न, राजा विराट और अजेय सात्यकि ने भी (अपने-अपने शंख बजाए)।
विस्तार: संजय द्वारा पाण्डवों की ओर से शंख बजाने वाले अन्य प्रमुख योद्धाओं का वर्णन जारी है। ये सभी महारथी अपनी शक्ति और युद्ध कौशल के लिए जाने जाते थे। शिखण्डी को जानबूझकर शामिल किया गया है क्योंकि वह भीष्म की मृत्यु का कारण बनने वाला था।