अर्जुन उवाच ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत ॥ 1.21 ॥
अर्जुन ने कहा: हे अच्युत (श्रीकृष्ण)! कृपा करके दोनों सेनाओं के मध्य में मेरा रथ खड़ा कीजिए।
विस्तार: 'अच्युत' का अर्थ है 'जो अपने पद से कभी न गिरे'। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को इस नाम से संबोधित किया क्योंकि वह जानता था कि श्रीकृष्ण कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करते। अर्जुन यह देखने के लिए उत्सुक है कि कौन-कौन युद्ध करने के लिए आए हैं और इसलिए उसने श्रीकृष्ण से रथ को दोनों सेनाओं के बीच ले जाने का अनुरोध किया।