संजय उवाच।
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत ।
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥ 1.24 ॥
संजय ने कहा: हे भारत (धृतराष्ट्र)! निद्रा को जीतने वाले (गुडाकेश) अर्जुन द्वारा इस प्रकार कहे जाने पर, भगवान् श्रीकृष्ण (हृषीकेश) ने उस उत्तम रथ को दोनों सेनाओं के बीच में ले जाकर खड़ा कर दिया।
विस्तार: 'हृषीकेश' (इंद्रियों के स्वामी) और 'गुडाकेश' (निद्रा/अज्ञान पर विजय पाने वाला) नामों का प्रयोग यहाँ प्रतीकात्मक है। श्रीकृष्ण ने, जो सब कुछ जानते थे, अर्जुन की बात मानकर रथ को बीच में खड़ा कर दिया, जिससे अर्जुन अपनी दुविधा की पराकाष्ठा पर पहुँच सके और गीता का उपदेश शुरू हो सके।