सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति ।
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते ॥ 1.29 ॥
...मेरे अंग शिथिल हो रहे हैं, मेरा मुँह सूख रहा है। मेरे शरीर में कंपकंपी (थरथराहट) हो रही है और रोंगटे खड़े हो रहे हैं।
विस्तार: अर्जुन अपनी मानसिक व्यथा को शारीरिक लक्षणों के माध्यम से व्यक्त करता है। ये सभी लक्षण अत्यधिक भय, तनाव और मानसिक आघात के प्रतीक हैं। अर्जुन एक महान् योद्धा होते हुए भी, अपने प्रियजनों के सामने खड़ा होकर मोह के कारण सामान्य मनुष्य की तरह शारीरिक रूप से कमजोर महसूस कर रहा है।