कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम् ।
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन ॥ 1.39 ॥
हे जनार्दन! कुल के नाश से होने वाले दोष को स्पष्ट रूप से देखने वाले हम लोगों को इस पाप कर्म से क्यों नहीं पीछे हट जाना चाहिए?
विस्तार: अर्जुन यहाँ अपने तर्क को पाण्डवों पर लागू करता है। चूंकि पाण्डवों की बुद्धि लोभ से भ्रष्ट नहीं हुई है, इसलिए उन्हें अपने विवेक का उपयोग करना चाहिए और कुल-नाश के पाप से बचना चाहिए। अर्जुन युद्ध के आरंभ से ठीक पहले अपने कर्तव्य (क्षत्रिय धर्म) और नैतिक चिंता (पारिवारिक धर्म) के बीच फँस गया है।