कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः ।
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥ 1.40 ॥
कुल का नाश होने पर सनातन (शाश्वत) कुल-धर्म नष्ट हो जाते हैं, और धर्म के नष्ट हो जाने पर संपूर्ण कुल को अधर्म दबा लेता है (अर्थात् पाप छा जाता है)।
विस्तार: अर्जुन अब तर्क देता है कि युद्ध के सामाजिक परिणाम क्या होंगे। कुल-धर्म के नष्ट होने से समाज में धार्मिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास होता है। जब कुल का धर्म नष्ट हो जाता है, तो अधर्म (पाप) हावी हो जाता है, जिससे संपूर्ण कुल और समाज का पतन होता है। यह उसका मुख्य तर्क है कि युद्ध से बचना क्यों महत्वपूर्ण है।