यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः ।
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् ॥ 1.46 ॥
यदि शस्त्रधारी धृतराष्ट्र के पुत्र (कौरव) मुझे युद्ध में बिना विरोध करने वाला और बिना शस्त्र वाला पाकर मार डालें, तो वह मेरे लिए अधिक कल्याणकारी होगा।
विस्तार: यह अर्जुन के मोह और विषाद का चरम बिंदु है। वह युद्ध करने के बजाय खुद को बलिदान करने को तैयार है। वह मानता है कि यदि वह आत्मरक्षा नहीं करता और कौरव उसे मार डालते हैं, तो यह पाप से बचने का एक बेहतर और कल्याणकारी मार्ग होगा। यहाँ अर्जुन पूर्णतः युद्ध से विमुख होकर शांति और अहिंसा को चुनता है।