॥ अध्याय 1, श्लोक 8 की व्याख्या ॥

भवान् भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च ॥ 1.8 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

(हमारी सेना में) आप (द्रोणाचार्य), पितामह भीष्म, कर्ण, युद्ध में विजयी कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र (भूरिश्रवा) भी हैं।

विस्तार: दुर्योधन अपनी सेना के सात सबसे बड़े महारथियों के नाम लेता है। इन सभी योद्धाओं में भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण स्वयं में अजय थे। दुर्योधन इन नामों को गिनाकर यह सिद्ध करने की कोशिश करता है कि उसकी सेना कितनी शक्तिशाली है। विकर्ण यहाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय है, क्योंकि वह कौरवों के पक्ष में होते हुए भी धर्मज्ञ था और पाण्डवों के प्रति न्यायपूर्ण रवैया रखता था।

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