तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः ।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता ॥ 10.11 ॥
कृष्ण कहते हैं: उन भक्तों पर कृपा करने के लिए, मैं उनके हृदय में स्थित होकर अज्ञान से उत्पन्न अंधकार को प्रकाशमान ज्ञान रूपी दीपक द्वारा नष्ट कर देता हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: यह ईश्वर की 'विशेष कृपा' है। जब आप अपनी पूरी शक्ति लगा देते हैं (जैसे IIT-Bombay की तैयारी में), तब एक बिंदु ऐसा आता है जहाँ उलझनें बढ़ने लगती हैं। उस समय, यदि आप ईश्वर से जुड़े हैं, तो वे भीतर से एक 'प्रकाश' (Intutive Knowledge) देते हैं जो सारे संशयों को खत्म कर देता है।