परं ब्रह्म परं धाम पवित्रं परमं भवान् ।
पुरुषं शाश्वतं दिव्यमादिदेवमजं विभुम् ॥
आहुस्त्वामृषयः सर्वे देवर्षिर्नारदस्तथा ।
असितो देवलो व्यासः स्वयं चैव ब्रवीषि मे ॥
अर्जुन बोले: आप ही परब्रह्म, परम धाम और परम पवित्र हैं। सभी ऋषि, देवर्षि नारद, असित, देवल और व्यास आपको सनातन, दिव्य पुरुष और आदिदेव कहते हैं, और अब आप स्वयं भी मुझसे यही कह रहे हैं।
आध्यात्मिक मर्म: यहाँ अर्जुन भगवान की सर्वोच्चता को स्वीकार कर रहे हैं। जिस तरह IIT-Bombay जैसे संस्थान की प्रतिष्ठा विद्वानों की बातों से सिद्ध होती है, वैसे ही भगवान की महिमा ऋषियों और स्वयं उनके वचनों से प्रमाणित है।