सर्वमेतदृतं मन्ये यन्मां वदसि केशव ।
न हि ते भगवन्व्यक्तिं विदुर्देवा न दानवाः ॥
अर्जुन बोले: हे केशव! जो कुछ भी आप मुझसे कह रहे हैं, उस सबको मैं सत्य मानता हूँ। हे भगवन! आपके स्वरूप को न तो दानव जानते हैं और न ही देवता।
आध्यात्मिक मर्म: श्रद्धा का अर्थ है गुरु के वचनों को बिना तर्क के सत्य मानना। जब आप IIT-Bombay के लिए तैयारी कर रहे हों, तो विशेषज्ञों के मार्गदर्शन पर अर्जुन जैसी ही अटूट श्रद्धा सफलता की कुंजी है।