न मे विदुः सुरगणाः प्रभवं न महर्षयः ।
अहमादिर्हि देवानां महर्षीणां च सर्वशः ॥ 10.2 ॥
कृष्ण कहते हैं: मेरी उत्पत्ति (प्रभाव) को न तो देवता जानते हैं और न ही महर्षि, क्योंकि मैं सब प्रकार से देवताओं और महर्षियों का भी आदि कारण हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: जैसे एक बच्चा अपने पिता के जन्म की गवाही नहीं दे सकता क्योंकि वह उसके बाद आया है, वैसे ही बुद्धिमान से बुद्धिमान व्यक्ति भी अपनी बुद्धि से ईश्वर की शुरुआत नहीं समझ सकता। वे समय और कारण से परे हैं।