अहमात्मा गुडाकेश सर्वभूतवाशयस्थितः ।
अहमादिश्च मध्यं च भूतानामन्त एव च ॥
हे गुडाकेश! मैं समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ और मैं ही सब भूतों का आदि, मध्य तथा अंत भी हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: भगवान हर जीव की चेतना हैं। वे ही शुरुआत हैं और वे ही परिणाम।