आदित्यानामहं विष्णुर्ज्योतिषां रविरंशुमान् ।
मरीचिर्मरुतामस्मि नक्षत्राणामहं शशी ॥
मैं आदित्यों में विष्णु और ज्योतियों में प्रकाशमान सूर्य हूँ। मैं मरुतों का तेज (मरीचि) हूँ और नक्षत्रों में चंद्रमा हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: भगवान हर समूह की सबसे श्रेष्ठ सत्ता हैं।