वेदानां सामवेदोऽस्मि देवानामस्मि वासवः ।
इन्द्रियाणां मनश्चास्मि भूतानामस्मि चेतना ॥
मैं वेदों में सामवेद हूँ, देवों में इन्द्र हूँ, इन्द्रियों में मन हूँ और प्राणियों में चेतना (जीवन-शक्ति) हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: इन्द्रियों को नियंत्रित करने वाला 'मन' ही ईश्वर का रूप है।