पुरोधसां च मुख्यं मां विद्धि पार्थ बृहस्पतिम् ।
सेनानीनामहं स्कन्दः सरसामस्मि सागरः ॥
कृष्ण कहते हैं: हे पार्थ! पुरोहितों में मुख्य बृहस्पति मुझे जान, सेनापतियों में मैं कार्तिकेय (स्कन्द) हूँ और जलाशयों में मैं समुद्र हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: बृहस्पति बुद्धि के प्रतीक हैं, कार्तिकेय साहस के, और समुद्र असीमता का। सफल होने के लिए ज्ञान की गहराई और रणभूमि में साहस—दोनों ही कृष्ण के दिव्य गुण हैं।