॥ श्लोक 26 ॥

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः ।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः ॥

धार्मिक व्याख्या

कृष्ण कहते हैं: मैं सब वृक्षों में अश्वत्थ (पीपल) हूँ, देवर्षियों में नारद हूँ, गन्धर्वों में चित्ररथ हूँ और सिद्धों में कपिल मुनि हूँ।

आध्यात्मिक मर्म: पीपल को पूजनीय माना जाता है क्योंकि वह जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक है। भगवान स्वयं को सर्वश्रेष्ठ सिद्धों और ऋषियों में प्रकट करते हैं ताकि हम उनकी श्रेष्ठता को समझ सकें।

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