उच्चैःश्रवसमश्वानां विद्धि माममृतोद्भवम् ।
ऐरावतं गजेन्द्राणां नराणां च नराधिपम् ॥
कृष्ण कहते हैं: घोड़ों में अमृत के साथ उत्पन्न होने वाला उच्चैःश्रवा नामक घोड़ा मुझे जान, हाथियों में ऐरावत और मनुष्यों में राजा मुझे जान।
आध्यात्मिक मर्म: ऐरावत और उच्चैःश्रवा समुद्र मंथन के अनमोल रत्न हैं। वैसे ही, मनुष्यों में जो समाज का नेतृत्व करता है (राजा), उसमें ईश्वरीय सत्ता का अंश होता है।