॥ श्लोक 28 ॥

आयुधानामहं वज्रं धेनूनामस्मि कामधुक् ।
प्रजनश्चास्मि कन्दर्पः सर्पाणामस्मि वासुकिः ॥

धार्मिक व्याख्या

कृष्ण कहते हैं: मैं शस्त्रों में वज्र हूँ, गौओं में कामधेनु हूँ, संतानोत्पत्ति का कारण कामदेव हूँ और सर्पों में वासुकि हूँ।

आध्यात्मिक मर्म: वज्र इंद्र का अमोघ अस्त्र है जो शक्ति का प्रतीक है। कामधेनु समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाली दिव्य गाय है। भगवान हर शक्ति और पूर्णता के मूल में हैं।

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