अनन्तश्चास्मि नागानां वरुणो यादसामहम् ।
पितॄणामर्यमा चास्मि यमः संयमतामहम् ॥
कृष्ण कहते हैं: मैं नागों में अनंत (शेषनाग) हूँ, जलचरों का अधिपति वरुण देव हूँ, पितरों में अर्यमा हूँ और शासन करने वालों में यमराज हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: यमराज न्याय और अनुशासन के प्रतीक हैं। भगवान यहाँ समझा रहे हैं कि संसार का जो नियम और न्याय व्यवस्था है, वह भी उन्हीं का स्वरूप है।