पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम् ।
झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ॥
कृष्ण कहते हैं: मैं पवित्र करने वालों में वायु हूँ, शस्त्रधारियों में श्री राम हूँ, मछलियों में मगरमच्छ हूँ और नदियों में गंगा (जाह्नवी) हूँ।
आध्यात्मिक मर्म: वायु और गंगा जल अशुद्धियों को मिटाकर पवित्रता प्रदान करते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम राम धर्म के रक्षक हैं। जहाँ भी पवित्रता और न्याय है, वहाँ ईश्वर हैं।