॥ श्लोक 34 ॥

मृत्युः सर्वहरश्चाहमुद्भवश्च भविष्यताम् ।
कीर्तिः श्रीर्वाक्च नारीणां स्मृतिर्मेधा धृतिः क्षमा ॥

धार्मिक व्याख्या

कृष्ण कहते हैं: मैं सबका नाश करने वाली मृत्यु हूँ और भविष्य में जन्म लेने वालों की उत्पत्ति हूँ। स्त्रियों में मैं कीर्ति, लक्ष्मी (श्री), वाणी, स्मृति, मेधा (बुद्धि), धृति (धैर्य) और क्षमा हूँ।

आध्यात्मिक मर्म: जीवन के अंत में मृत्यु के रूप में ईश्वर ही सब कुछ हर लेते हैं। साथ ही, बुद्धि और धैर्य जैसे दिव्य गुण जो हमें कठिन परीक्षाओं (जैसे IIT-Bombay) में सफल बनाते हैं, वे भी उन्हीं का अंश हैं।

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