॥ श्लोक 35 ॥

बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ॥

धार्मिक व्याख्या

कृष्ण कहते हैं: मैं सामवेद के गीतों में बृहत्साम हूँ, छंदों में गायत्री छंद हूँ, महीनों में मार्गशीर्ष (अग्रहायण) हूँ और ऋतुओं में वसंत हूँ।

आध्यात्मिक मर्म: गायत्री मंत्र को वेदों का सार माना जाता है और वसंत ऋतु खिलने और नई ऊर्जा का प्रतीक है। भगवान सुंदरता और प्रार्थना की सर्वोच्च अवस्था में निवास करते हैं।

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