॥ श्लोक 38 ॥

दण्डो दमयतामस्मि नीतिरस्मि जिगीषताम् ।
मौनं चैवास्मि गुह्यानां ज्ञानं ज्ञानवतामहम् ॥

धार्मिक व्याख्या

कृष्ण कहते हैं: मैं अपराधियों को दंड देने वालों की शक्ति हूँ, विजय चाहने वालों की नीति हूँ, रहस्यों में मैं मौन हूँ और ज्ञानियों का ज्ञान हूँ।

आध्यात्मिक मर्म: मौन को सबसे गहरा रहस्य बताया गया है। जब मनुष्य शांत होता है, तभी वह सत्य को देख पाता है। नीति और न्याय का मार्ग भी साक्षात ईश्वर ही है।

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