यच्चापि सर्वभूतानां बीजं तदहमर्जुन ।
न तदस्ति विना यत्स्यान्मया भूतं चराचरम् ॥
कृष्ण कहते हैं: हे अर्जुन! जो समस्त प्राणियों की उत्पत्ति का मूल कारण (बीज) है, वह मैं ही हूँ। संसार में ऐसी कोई भी वस्तु नहीं है जो मेरे बिना अस्तित्व में रह सके।
आध्यात्मिक मर्म: यह श्लोक अद्वैत का संदेश देता है। ईश्वर और सृष्टि अलग-अलग नहीं हैं; प्रत्येक अणु में वही परमात्मा व्याप्त है।