नान्तोऽस्ति मम दिव्यानां विभूतीनां परन्तप ।
एष तूद्देशतः प्रोक्तो विभूतेर्विस्तरो मया ॥
कृष्ण कहते हैं: हे परंतप! मेरी दिव्य विभूतियों का कोई अंत नहीं है। मैंने तो तुझे अपनी विभूतियों का बहुत थोड़ा सा विस्तार उदाहरण के रूप में बताया है।
आध्यात्मिक मर्म: ईश्वर अनंत हैं और मानव बुद्धि सीमित है। भगवान केवल कुछ संकेत देते हैं ताकि हम उनकी असीमता का अनुमान लगा सकें।