एतां विभूतिं योगं च मम यो वेत्ति तत्त्वतः ।
सोऽविकम्पेन योगेन युज्यते नात्र संशयः ॥ 10.7 ॥
कृष्ण कहते हैं: जो मनुष्य मेरी इस परम ऐश्वर्यमयी विभूति को और योगशक्ति को तत्व से जानता है, वह अटल भक्ति योग के द्वारा मुझमें स्थित हो जाता है; इसमें कोई संदेह नहीं है।
आध्यात्मिक मर्म: जब हम यह जान लेते हैं कि संसार की हर महानता और हर शक्ति का स्रोत भगवान ही हैं, तो हमारी श्रद्धा स्थिर (Unshakable) हो जाती है। फिर मन यहाँ-वहाँ नहीं भटकता।