॥ अध्याय 14, श्लोक 1 ॥

श्रीभगवानुवाच :
परं भूयः प्रवक्ष्यामि ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम् ।
यज्ज्ञात्वा मुनयः सर्वे परां सिद्धिमितो गताः ॥ 14.1 ॥

धार्मिक व्याख्या

श्रीभगवान बोले: मैं फिर से तेरे लिए समस्त ज्ञानों में भी उत्तम उस 'परम ज्ञान' को कहूँगा, जिसे जानकर सभी मुनि जन इस संसार-बंधन से मुक्त होकर परम सिद्धि को प्राप्त हो गए हैं।

विस्तृत व्याख्या: भगवान यहाँ इस अध्याय की महत्ता बता रहे हैं। वे इसे 'ज्ञानानां ज्ञानमुत्तमम्' कह रहे हैं क्योंकि यह मनुष्य के स्वभाव और व्यवहार के मूल कारण (तीन गुणों) को समझाता है। यह वह ज्ञान है जो बड़े-बड़े ऋषियों को भी मोक्ष तक ले गया है।

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