सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते ।
ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत ॥ 14.11 ॥
जिस समय इस देह में तथा अंतःकरण और इंद्रियों में चेतनता और विवेक-शक्ति उत्पन्न होती है, उस समय ऐसा जानना चाहिए कि सत्व गुण बढ़ा हुआ है।
विस्तृत व्याख्या: जब आपके मन में स्पष्टता हो, पढ़ने में मन लगे और आप शांत महसूस करें, तो समझें कि सत्व गुण प्रधान है। इस स्थिति में मनुष्य की बुद्धि सही निर्णय लेती है और वह सत्य की ओर बढ़ता है।