अर्जुन उवाच :
कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो ।
किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते ॥ 14.21 ॥
अर्जुन ने पूछा: हे प्रभु! इन तीनों गुणों से अतीत (ऊपर उठा हुआ) पुरुष किन लक्षणों से युक्त होता है? उसका आचरण कैसा होता है और वह किस उपाय से इन तीनों गुणों से परे जाता है?
विस्तृत व्याख्या: यहाँ अर्जुन तीन बातें पूछ रहे हैं: 1. गुणातीत पुरुष के लक्षण (Internal signs), 2. उसका व्यवहार (External conduct), और 3. गुणों को पार करने की विधि (Method of transcendence)। यह जिज्ञासा हर साधक के मन में होती है।