॥ अध्याय 2, श्लोक 16 की व्याख्या ॥

नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः ।
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः ॥ 2.16 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

असत्य (नाशवान वस्तु) का कोई अस्तित्व नहीं है और सत्य (आत्मा) का कभी अभाव नहीं होता। तत्त्वदर्शियों ने इन दोनों के वास्तविक स्वरूप का निष्कर्ष निकाल लिया है।

विस्तार: यह ज्ञान योग का बहुत गहरा श्लोक है। कृष्ण स्पष्ट करते हैं कि शरीर 'असत्य' है क्योंकि यह निरंतर बदलता है और अंततः नष्ट हो जाता है। लेकिन आत्मा 'सत्य' है क्योंकि वह शाश्वत है। इसलिए, जो नष्ट होने वाला है उसके लिए शोक करना व्यर्थ है, और जो शाश्वत है उसे कोई मार नहीं सकता।

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