॥ अध्याय 2, श्लोक 17 की व्याख्या ॥

अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम् ।
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति ॥ 2.17 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

तुम उस आत्मा को अविनाशी समझो, जिससे यह संपूर्ण शरीर और जगत व्याप्त है। उस अव्यय (नष्ट न होने वाले) आत्मा का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है।

विस्तार: भगवान कृष्ण आत्मा की शक्ति के बारे में बता रहे हैं। वे कहते हैं कि जिस तरह प्रकाश पूरे कमरे में फैला रहता है, वैसे ही चेतना (आत्मा) पूरे शरीर में व्याप्त है। कोई भी अस्त्र, शस्त्र या शक्ति उस चेतना को मिटा नहीं सकती। अर्जुन को यह समझना होगा कि वह जिसे मारना चाहता है, वह वास्तव में मर ही नहीं सकता।

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