नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥ 2.23 ॥
इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, आग इसे जला नहीं सकती, जल इसे गीला नहीं कर सकता और वायु इसे सुखा नहीं सकती।
विस्तार: यह गीता के सबसे प्रभावशाली श्लोकों में से एक है। यहाँ भगवान कृष्ण चार मुख्य तत्वों (अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी/शस्त्र) के माध्यम से बताते हैं कि भौतिक जगत की कोई भी वस्तु सूक्ष्म आत्मा को प्रभावित नहीं कर सकती। अर्जुन को यह समझना होगा कि युद्ध में केवल शरीरों का नाश होगा, उनके भीतर स्थित अमर चेतना पर एक खरोंच भी नहीं आएगी।