॥ अध्याय 2, श्लोक 26 की व्याख्या ॥

अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् ।
तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि ॥ 2.26 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

परंतु हे महाबाहो! यदि तुम इस आत्मा को सदा जन्म लेने वाला और सदा मरने वाला ही मानते हो, तो भी तुम्हें इस प्रकार शोक करना उचित नहीं है।

विस्तार: यहाँ कृष्ण एक 'तर्क' (Logic) दे रहे हैं। वे कहते हैं कि यदि तुम आत्मा की अमरता के सिद्धांत को नहीं भी मानते और यह सोचते हो कि जीवन शरीर के साथ ही शुरू और खत्म होता है, तो भी दुखी होने का कोई लाभ नहीं है। क्योंकि जो चीज बार-बार जन्म लेती है और मरती है, वह एक प्राकृतिक नियम है और नियम पर शोक नहीं किया जाता।

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