जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च ।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ॥ 2.27 ॥
क्योंकि जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इसलिए जो अटल है (जिसे टाला नहीं जा सकता), उसके विषय में तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए।
विस्तार: यह संसार का सबसे बड़ा सत्य है। कृष्ण अर्जुन को वास्तविकता स्वीकार करने की प्रेरणा देते हैं। यदि कोई पैदा हुआ है, तो उसका अंत अनिवार्य है। यह एक अपरिहार्य चक्र है। जैसे हम सूरज के डूबने पर शोक नहीं मनाते क्योंकि हमें पता है वह कल फिर उगेगा, वैसे ही जन्म और मृत्यु के प्रति भी तटस्थ रहना चाहिए।