॥ अध्याय 2, श्लोक 28 की व्याख्या ॥

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत ।
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना ॥ 2.28 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

हे भारत! जन्म से पहले सभी प्राणी अदृश्य (अव्यक्त) थे, जन्म और मृत्यु के बीच के काल में वे दिखाई देते हैं (व्यक्त), और मृत्यु के बाद वे फिर से अदृश्य हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में शोक करने की क्या बात है?

विस्तार: यह एक बहुत ही व्यावहारिक दर्शन है। हम इस दुनिया में एक यात्रा पर आए हैं। यात्रा से पहले हम कहाँ थे, हमें नहीं पता। यात्रा के बाद कहाँ जाएंगे, यह भी रहस्य है। केवल 'बीच' का समय हमें दिखाई देता है। जब हम मूल रूप से अदृश्य ही हैं, तो थोड़े समय के लिए दिखाई देने और फिर छिप जाने पर दुख कैसा?

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