॥ अध्याय 2, श्लोक 33 की व्याख्या ॥

अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि ।
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि ॥ 2.33 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

किंतु यदि तुम इस धर्मयुक्त युद्ध को नहीं करोगे, तो तुम अपने स्वधर्म और कीर्ति (यश) को खोकर पाप के भागी बनोगे।

विस्तार: यहाँ कृष्ण चेतावनी दे रहे हैं। अर्जुन को लग रहा था कि युद्ध न करना पुण्य का काम है, लेकिन कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य (अन्याय के विरुद्ध लड़ना) से भागना पाप है। यदि अर्जुन युद्ध छोड़ता है, तो समाज उसे कायर कहेगा और वह अपना गौरव खो देगा।

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