भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः ।
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् ॥ 2.35 ॥
जिन महारथियों की दृष्टि में तुम पहले बहुत सम्मानित थे, वे अब यही मानेंगे कि तुम डर के मारे युद्ध से हट गए हो। इस प्रकार तुम उनकी नजरों में गिर जाओगे और वे तुम्हें तुच्छ समझने लगेंगे।
विस्तार: कृष्ण अर्जुन को योद्धाओं की मानसिकता समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि भले ही अर्जुन दया या करुणा के कारण युद्ध न करना चाहे, लेकिन उसके शत्रु (जैसे कर्ण, दुर्योधन) इसे करुणा नहीं बल्कि 'कायरता' समझेंगे। एक महान योद्धा के लिए अपने शत्रुओं की नजरों में कायर साबित होना बहुत बड़ा अपमान है।