ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन ।
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ॥ 3.1 ॥
अर्जुन ने पूछा: हे जनार्दन! यदि आप कर्म की अपेक्षा ज्ञान (बुद्धि) को श्रेष्ठ मानते हैं, तो हे केशव! फिर आप मुझे इस घोर युद्ध रूपी कर्म में क्यों लगा रहे हैं?
विस्तार: अर्जुन भ्रमित हैं। उन्हें लगता है कि अगर स्थिर बुद्धि (ज्ञान) ही सब कुछ है, तो काम करने की क्या जरूरत? अक्सर हमें भी लगता है कि केवल सोचने या ज्ञान लेने से काम चल जाएगा, लेकिन कृष्ण यहाँ से कर्म की अनिवार्यता समझाना शुरू करेंगे।