इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः ।
तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव सः ॥ 3.12 ॥
यज्ञ द्वारा पुष्ट किए गए देवता तुम लोगों को इच्छित भोग प्रदान करेंगे। परन्तु जो पुरुष देवताओं द्वारा दिए गए इन भोगों को उन्हें अर्पित किए बिना ही स्वयं भोगता है, वह निश्चित रूप से 'चोर' है।
विस्तार: यह श्लोक कृतज्ञता (Gratitude) के महत्व को बताता है। अगर हमें बुद्धि, शरीर और साधन मिले हैं, तो हमारा कर्तव्य है कि हम उनका उपयोग दुनिया के भले के लिए करें। केवल अपने बारे में सोचना 'चोरी' के समान है। एक IITian के लिए यह याद रखना बहुत जरूरी है कि उसकी शिक्षा का उद्देश्य समाज को वापस देना (Give back) है।