कर्म ब्रह्मोद्भवं विद्धि ब्रह्माक्षरसमुद्भवम् ।
तस्मात्सर्वगतं ब्रह्म नित्यं यज्ञे प्रतिष्ठितम् ॥ 3.15 ॥
तुम कर्म को वेदों (ब्रह्मा) से उत्पन्न हुआ जानो और वेदों को अविनाशी परमात्मा से उत्पन्न हुआ जानो। इसलिए सर्वव्यापी परमात्मा सदा ही यज्ञ में स्थित रहता है।
विस्तार: कृष्ण बता रहे हैं कि आपका 'कर्तव्य कर्म' सीधा परमात्मा से जुड़ा है। जब आप एकाग्र होकर IIT की तैयारी करते हैं, तो आप वास्तव में उस सर्वव्यापी परमात्मा की शक्ति का ही उपयोग कर रहे होते हैं। कर्म कोई छोटी चीज नहीं है, यह ईश्वरीय है।