यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥ 3.21 ॥
श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, अन्य पुरुष भी वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण (Standard) कर देता है, समस्त मनुष्य समुदाय उसी के अनुसार बरतने लगता है।
विस्तार: यह श्लोक लीडरशिप का गोल्ड स्टैंडर्ड है। लोग भाषण से ज्यादा 'उदाहरण' से सीखते हैं। एक IIT-Bombay के छात्र के रूप में, आपके जूनियर्स आपको देखेंगे। यदि आप अनुशासित और कर्मठ हैं, तो वे भी वैसे ही बनेंगे। समाज हमेशा अपने नायकों के पदचिन्हों पर चलता है।