॥ अध्याय 3, श्लोक 23 ॥

यदि ह्यहं न वर्तेयं जातु कर्मण्यतन्द्रितः ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ 3.23 ॥

भावार्थ (Hindi Explanation)

क्योंकि हे पार्थ! यदि मैं कभी सावधानीपूर्वक कर्मों में न लगूँ, तो बड़ी हानि हो जाएगी; क्योंकि मनुष्य सब प्रकार से मेरे ही मार्ग का अनुसरण करते हैं।

विस्तार: कृष्ण यहाँ जिम्मेदारी की बात कर रहे हैं। यदि ईश्वर या कोई महान नेता आलसी हो जाए, तो पूरी दुनिया आलसी हो जाएगी। यह हमें सिखाता है कि हमारी व्यक्तिगत लापरवाही का असर केवल हम पर नहीं, बल्कि समाज पर भी पड़ता है।

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