तत्त्ववित्तु महाबाहो गुणकर्मविभागयोः ।
गुणा गुणेषु वर्तन्त इति मत्वा न सज्जते ॥ 3.28 ॥
परन्तु हे महाबाहो! गुण-विभाग और कर्म-विभाग के तत्व को जानने वाला ज्ञानी पुरुष गुण ही गुणों में बरत रहे हैं ऐसा समझकर उनमें आसक्त नहीं होता।
विस्तार: ज्ञानी व्यक्ति समझता है कि इन्द्रियाँ (गुण) अपने विषयों (गुणों) में काम कर रही हैं। वह स्वयं को एक 'साक्षी' (Observer) के रूप में देखता है। जैसे जब आप कोई जटिल Physics की प्रॉब्लम सॉल्व कर रहे हों, तो यह समझना कि आपका मस्तिष्क (प्रकृति का हिस्सा) उस डेटा को प्रोसेस कर रहा है—यह आपको मानसिक शांति देगा और परफॉरमेंस बढ़ाएगा।