प्रकृतेर्गुणसम्मूढाः सज्जन्ते गुणकर्मसु ।
तानकृत्स्नविदो मन्दान्कृत्स्नविन्न विचालयेत् ॥ 3.29 ॥
प्रकृति के गुणों से अत्यंत मोहित हुए अज्ञानी पुरुष उन गुणों और कर्मों में आसक्त रहते हैं; उन पूर्णतया न समझने वाले मंदबुद्धि अज्ञानियों को पूर्ण ज्ञानी विचलित न करे।
विस्तार: कृष्ण कहते हैं कि जो लोग अभी भी भौतिक सुखों के पीछे पागल हैं, उन्हें अचानक उनके मार्ग से मत हटाओ। बल्कि अपने श्रेष्ठ आचरण से उन्हें धीरे-धीरे प्रेरित करो।