न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते ।
न च संन्यसनादेव सिद्धिं समधिगच्छति ॥ 3.4 ॥
न तो कर्मों का आरम्भ किए बिना कोई निष्कामता को प्राप्त होता है, और न ही केवल कर्मों के त्याग (संन्यास) मात्र से सिद्धि प्राप्त होती है।
विस्तार: यह बहुत महत्वपूर्ण है! कृष्ण कह रहे हैं कि काम से भागना समाधान नहीं है। आप पढ़ाई छोड़कर ज्ञानी नहीं बन सकते। सिद्धि पाने के लिए कर्म करना ही होगा। बिना 'Input' (कर्म) के 'Output' (सिद्धि) नहीं मिल सकता।