इन्द्रियाणि मनो बुद्धिरस्याधिष्ठानमुच्यते ।
एतैर्विमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम् ॥ 3.40 ॥
इन्द्रियाँ, मन और बुद्धि—ये सब इस 'काम' के निवास स्थान (Base) कहे जाते हैं। यह इन सबके द्वारा ही ज्ञान को ढँककर जीवात्मा को मोहित करता है।
विस्तार: युद्ध जीतने के लिए शत्रु के ठिकाने का पता होना जरूरी है। 'काम' हमारी इन्द्रियों (देखना/सुनना), मन (कल्पना) और बुद्धि (निर्णय) में छिपा रहता है। जब हम यह समझ जाते हैं, तब हम इसे जड़ से खत्म करने की तैयारी कर सकते हैं।