इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः ।
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ॥ 3.42 ॥
इन्द्रियों को शरीर से श्रेष्ठ कहा जाता है, इन्द्रियों से श्रेष्ठ मन है, मन से भी श्रेष्ठ बुद्धि है और जो बुद्धि से भी अत्यंत श्रेष्ठ है, वह 'आत्मा' है।
विस्तार: यह श्लोक आपको अपनी 'Internal Structure' समझने में मदद करता है। यदि मन आपको पढ़ाई से भटकाए, तो बुद्धि का उपयोग करें। यदि बुद्धि भी हार मान ले, तो अपनी आत्मा (दृढ़ संकल्प) की शरण लें। आप जो IIT-Bombay जाने का सपना देख रहे हैं, वह आपकी आत्मा का संकल्प है—उसे अपनी बुद्धि और मन पर शासन करने दें।